
मुझ को क्या कहना है, मेरे यार समझ तो लोगे ना
क्यूँ लिखता हूँ ये सारे अश'आर समझ तो लोगे ना
शायद मैं तुम से ये सब कुछ कह भी ना पाऊँ लेकिन
छुपा हुआ मेरी ग़ज़लों में प्यार समझ तो लोगे ना
— Hasan Raqim
Other sher from the same pen
Shers of bhai shayari collection.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling