मोहब्बत का मेरी मौसम सुहाना होते होते भी
वो मुझ को छोड़ ही बैठा दीवाना होते होते भी
ये सोचा था की ये पल भी गुज़र ही जाएगा लेकिन
बहुत दुख दे गया ये पल पुराना होते होते भी
वो कहता था कि आएगा ज़माना अपने मिलने का
ज़माना हो गया यारों ज़माना होते होते भी
मेरे दुश्मन की सफ़ में है मेरा आशिक़ इसे देखो
ये बच ही जाएगा मेरा निशाना होते होते भी
— Hasan Raqim















