पहले उस का ग़म हो जाऊँ
फिर उस का मरहम हो जाऊँ
रफ़्ता रफ़्ता वो मेरा हो
मैं उस का इकदम हो जाऊँ
उस पर बरसे फूल हमेशा
कुछ ऐसा मौसम हो जाऊँ
उस के लब की हँसी बनूँ मैं
चेहरे की शबनम हो जाऊँ
या फिर उस का अश्क बनूँ मैं
ऐसे ख़ुद में नम हो जाऊँ
— Hasan Raqim
फिर उस का मरहम हो जाऊँ
रफ़्ता रफ़्ता वो मेरा हो
मैं उस का इकदम हो जाऊँ
उस पर बरसे फूल हमेशा
कुछ ऐसा मौसम हो जाऊँ
उस के लब की हँसी बनूँ मैं
चेहरे की शबनम हो जाऊँ
या फिर उस का अश्क बनूँ मैं
ऐसे ख़ुद में नम हो जाऊँ
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