kar baithe ho us dil men bhi ghar tumko mubarak | कर बैठे हो उस दिल में भी घर तुमको मुबारक

  - Hasan Raqim

कर बैठे हो उस दिल में भी घर तुमको मुबारक
वो शख़्स था तो मेरा मगर तुमको मुबारक

हम जैसे दरख़्तों को ज़मीं आख़िरी हद है
तुम बादलों के हो तो ये पर तुमको मुबारक

टूटे हुए दिल को है हराम इसका हर एक जाम
इस 'इश्क़ की बोतल का असर तुमको मुबारक

मेरी गली से बस हो गुज़र यार का मेरे
बाक़ी के जहाँ भर का गुज़र तुमको मुबारक

  - Hasan Raqim

Duniya Shayari

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