kuchh aise kaam vo apna nikaal leta hai | कुछ ऐसे काम वो अपना निकाल लेता है

  - Hasan Raqim

कुछ ऐसे काम वो अपना निकाल लेता है
के हर किसी से ही रिश्ता निकाल लेता है

है इक चिराग़ के मानिंद कोई इस दिल में
कि मेरे दिल से अँधेरा निकाल लेता है

ज़रूरतों से घिरा आदमी भी मुश्किल में
पहाड़ काट के रस्ता निकाल लेता है

वो इम्तिहान-ए-ज़िंदगी में जब अटकता है
तो फिर दुआओं का पर्चा निकाल लेता है

वो इसकी क़ैदस आज़ाद हो निकलता है
जो दिल से ख़्वाहिश-ए-दुनिया निकाल लेता है

  - Hasan Raqim

Rishta Shayari

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