अपने होटों पर गुलाबी पत्तियाँ रख
जब भी ग़ुस्सा आए तो ख़ामोशियाँ रख
सिर्फ़ बातों से मोहब्बत कब हुई है
'इश्क़ में थोड़ी बहुत तो शोख़ियाँ रख
कौन सुनता है किसी की ऊँची आवाज़
अपने लहजे में हमेशा नरमियाँ रख
इस तरह भी नेकी की जा सकती है शाज़
सूखे पेड़ों पर किसी दिन आशियाँ रख
ज़िन्दगी क्या है बताने के लिए शाज़
अपने हाथों में ज़रा परछाइयाँ रख
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