मेरे दुश्मन भी रस्ता दिखा देते हैं
पर अचानक से काँटें बिछा देते हैं
होंठ ख़ामोश रहते हैं उनके मगर
आँखों से दर्द अपना सुना देते हैं
बनके पत्थर हमारी नई राह में
अपने ही लोग हमको गिरा देते हैं
पाँव रखते नहीं हैं ज़मीं पर जो लोग
हदिसे उनको भी फिर जगा देते हैं
कश्मकश में हमें डाल रक्खा है शाज़
बात करते नहीं मुस्कुरा देते हैं
यह मोहब्बत भी कैसी मोहब्बत है शाज़
मिलने आते हैं जब ग़म बढ़ा देते हैं
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