इस लिए मैं पास उस के देर तक ठहरा नहीं था
बात थी पर बात करने का कोई ज़रिया नहीं था
मैं मना लेता उसे फिर बाँध कर अपनी क़सम में
पर कहानी-कार ने मज़मून ये लिक्खा नहीं था
ग़ैर को मैं ने ठहरने की इज़ाज़त तो नहीं दी
फूल पर अब तितलियाँ बैठी नहीं ऐसा नहीं था
आप के लब आँख में अब रक़्स करते फिर रहे हैं
इस तरह भी आप को जाते हुए हँसना नहीं था
ज़िंदगी ने इश्क़ फिर छीना है दे के ये तसल्ली
ठीक था पर ये तिरे मेआ'र पे जँचता नहीं था
आप की ही है सिफ़त ये अब मैं दफ़्तर जा रहा हूँ
पहले ये लड़का किसी की बात तक सुनता नहीं था
मौत पे जो रो रहे थे ये वही कुछ लोग थे जो
कल तलक कहते थे लड़का आप का अच्छा नहीं था















