
लिखने को तो लिख दूँ लेकिन ज़ाया' भी जा सकता है
दर्द मुहब्बत का लिख दूँ तो गाया भी जा सकता है
बैठो मेरे पास रहो तुम इतना तो उपकार करो
तुम जो उठकर चल दोगे तो साया भी जा सकता है
— Kavi bhanu pratap mishra
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