hamko duniya ke aazmaane se pahle | हमको दुनिया के आज़माने से पहले

  - Lalit Mohan Joshi

हमको दुनिया के आज़माने से पहले
हमको रुकना है इस नज़ारे से पहले

याद मेरी तुमको बहुत आएगी फिर
तुमको बोला था मैंने जाने से पहले

मैं खड़ा हूँ ग़म के समुंदर किनारे
देखना है मुझको डुबाने से पहले

इक घड़ी मैंने सोचकर ये ख़रीदी
जो बता देगी ग़म को आने से पहले

इक दवा मुझको चाहिए ज़ख़्म ख़ातिर
ज़ख़्म भी भरना है वो बढ़ने से पहले

दिल को पहले तो जिस्म को बाद मारा
बस बदन को ढोया यूँँ मरने से पहले

ये सुख़न-वर बेदर्द इक मौत पाए
ये दुआ कर दो यार जाने से पहले

  - Lalit Mohan Joshi

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