
ग़ालिब की बातें तुम ज़रा सी ही मगर दिल से सुनो
है ज़िंदगी को कैसे ग़ज़लों में उतारा ये सुनो
हर लफ़्ज़ अपने में ज़माने को बयाँ करता लिखा
ग़ालिब ने ग़ालिब को लिखा कितने क़रीने से सुनो
— Lalit Mohan Joshi
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