yuñ lag raha tha jee rahe hon haal mast men | यूँँ लग रहा था जी रहे हों हाल मस्त में

  - Amaan mirza

यूँँ लग रहा था जी रहे हों हाल मस्त में
आए जब इक हसीना के दस्तार दस्त में

छोड़ो ये शर्म जान इक अंगड़ाई लो ज़रा
देखो कि आ रही है जवानी भी जस्त में

आशिक़ भी ख़ूब ऐश में है हिज्र ओढ़ कर
ऐसा भी जाने क्या मज़ा है इस शिकस्त में

ये और बात चीख़ना आता नहीं मुझे
लेकिन मैं आता हूँ यहाँ अव्वल निशस्त में

थोड़ी बुलंदी चढते ही तू भी चमक गया
थोड़ा ही वक़्त बाक़ी है अब सूर्य अस्त में

  - Amaan mirza

More by Amaan mirza

As you were reading Shayari by Amaan mirza

Similar Writers

our suggestion based on Amaan mirza

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari