बात हम दोनों को ही करनी है लेकिनदोनों ही ख़ामोश हैं अपनी अना मेंदर्द ग़म तकलीफ़ आँसू मिलते हैं बसऔर कुछ भी तो नहीं मिलता वफ़ा में— Amaan mirza