इज़्ज़त करूँँगा मैं भी रहूँगा लिहाज़ मेंतू चीख़ता रहेगा अगर एक साज़ मेंमहफ़िल में अच्छी शा'इरी की क्या बढ़ी डिमांडकव्वे भी ख़ुद को गिनने लगे सरफ़राज़ में— Amaan mirza