जिस रोज़ हराफ़त से आईन बने होंगे
गुस्ताख़ सितमगर भी ज़ोरीन बने होंगे
इस शहर कि सड़कों पे हर एक मुहाजिर भी
बर्बाद नज़ारों के शौक़ीन बने होंगे
ये लोग ख़ुदा से यूँ अब आँख मिलाते हैं
सोचो तो भला कैसे बे-दीन बने होंगे
— Nikhil Tiwari 'Nazeel'
गुस्ताख़ सितमगर भी ज़ोरीन बने होंगे
इस शहर कि सड़कों पे हर एक मुहाजिर भी
बर्बाद नज़ारों के शौक़ीन बने होंगे
ये लोग ख़ुदा से यूँ अब आँख मिलाते हैं
सोचो तो भला कैसे बे-दीन बने होंगे
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