झूठी है मुहब्बत तो जताने के लिए आ

सच्चा है अगर इश्क़ निभाने के लिए आ

हूँ तेरा गुनहगार तो दिलवा दे सज़ा पर
बे-जुर्म हूँ तो मुझ को बचाने के लिए आ

मेरा तो ज़माने में नहीं कोई भी लेकिन
तेरा तो ज़माना है ज़माने के लिए आ

मेरा ये भरम है तो इसे रहने दे क़ायम
तू भी है मिरा मुझ को जताने के लिए आ

मेरी जो हक़ीक़त है बहुत दर्द भरी है
तू मुझ को हसीं ख़्वाब दिखाने के लिए आ

मिल जाए मुझे ख़ुद-कुशी की कोई तो सूरत
दिल ख़ुश है बहुत इस को दुखाने के लिए आ

तुझ को नहीं मिलना है गले तो न सही पर
तू दोस्त है तो हाथ मिलाने के लिए आ

तू कौन है मेरा ये तो दुनिया को पता है
मैं कौन हूँ तेरा ये बताने के लिए आ

— Praveen Sharma SHAJAR

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