लोग सोने को बिस्तर नहीं अब बदन ढूँढ़ते हैंबस मसलने के मक़सद से वहशी चमन ढूँढ़ते हैंहाल इन बेटियों का जहाँ में तिरे देखते जबरात सोने को हम भी ख़ुदाया कफ़न ढूँढ़ते हैं— Chetan Verma