यक़ीं था हम को चरबा ढूँढ़ लेंगे हम
ज़मीं पे रब सा चेहरा ढूँढ़ लेंगे हम
करेंगे काम वो जो हो नहीं सकता
कोई तुम-सा भी प्यारा ढूँढ़ लेंगे हम
जबीं से होंठों तक होते हुए फिर तो
बदन का तेरे रस्ता ढूँढ़ लेंगे हम
सहारा तेरे हाथों का मिले गर तो
नदी से दूर सहरा ढूँढ़ लेंगे हम
पकड़कर हाथ तेरा हम चले फिर तो
सदी का इक किनारा ढूँढ़ लेंगे हम
— Ankit Raj















