kya dost muhabbat ka niyam kuchh nahin hota | क्या दोस्त मुहब्बत का नियम कुछ नहीं होता

  - Rishabh Sharma

क्या दोस्त मुहब्बत का नियम कुछ नहीं होता
खा लेते हैं सब झूठी क़सम कुछ नहीं होता

वो पर्दा नशीं पूछती रहती है मुझे रोज़
क्या वाकई में अगला जनम कुछ नहीं होता

परवत के मुहाने पे खड़ा सोच रहा हूँ
किसने कहा था एक क़दम कुछ नहीं होता

और वाक़्या मशहूर था जिस पेड़ को लेकर
उस पेड़ पे लिक्खा था भरम कुछ नहीं होता

वो रौशनी के दिन थे ऋषभ शर्मा तेरे साथ
जब तू हमें समझाता था ग़म कुछ नहीं होता

  - Rishabh Sharma

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