jo ki hote hue aazaar bahut hota hai | जो कि होते हुए आज़ार बहुत होता है

  - Rishabh Sharma

जो कि होते हुए आज़ार बहुत होता है
बाद होने के मज़ेदार बहुत होता है

दिन बदलने के लिए ख़ुदकुशी करने के लिए
एक ही शख़्स का इनकार बहुत होता है

भागने वाले को दुनिया भी बहुत छोटी है
घूमने वाले को बाज़ार बहुत होता है

जिसने भेजा है तुम्हें जा के उसे कहना तुम
लाख प्यादों में भी सालार बहुत होता है

जंग हर चीज़ को हथियार बना देती है
बच्चे के हाथ में परकार बहुत होता है

छत से छत वालों में दीवार खड़ी करने को
उनके बच्चों में हुआ प्यार बहुत होता है

  - Rishabh Sharma

Dushman Shayari

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