udaas ladkiyon se raabta nibhaata hoon | उदास लड़कियों से राब्ता निभाता हूँ

  - Rishabh Sharma

उदास लड़कियों से राब्ता निभाता हूँ
मैं एक फूल हूँ जो तितलियाँ बचाता हूँ

जी मैं ही इश्क़ में हारे हुओं का मुर्शिद हूँ
जी मैं ही हर सदी में क़ैस बन के आता हूँ

सताई होती हैं जो आपके समंदर की
मैं ऐसी मछलियों के साथ गोते खाता हूँ

किसी के वास्ते काँटे नहीं बिछाता मैं
मगर यूँ भी नहीं के काँटों को हटाता हूँ

मैं मौसमी हँसी का मारा हूँ कि कोई दिन
मैं साल भर में कोई दिन ही मुस्कुराता हूँ

बदन भी आते हैं और हिचकियाँ भी आती हैं
मैं जिनको भूल गया उनको याद आता हूँ

निभाने जैसा तो कुछ भी नहीं है उसमें मगर
वो मर न जाए कहीं इसलिए निभाता हूँ

  - Rishabh Sharma

Ulfat Shayari

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