murli chhooti shank baja raas tajaa phir yuddh saja | मुरली छूटी शंख बजा रास तजा फिर युद्ध सजा

  - Zubair Ali Tabish

मुरली छूटी शंख बजा रास तजा फिर युद्ध सजा
क्या पीछे क्या आगे है सब कुछ राधे राधे है

  - Zubair Ali Tabish

Fasad Shayari

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    सच्चाई को अपनाना आसान नहीं
    दुनिया भर से झगड़ा करना पड़ता है
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    मेरी लग़ज़िश से मयख़ाना चलता है

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    एक गली में आना-जाना चलता है

    पल-पल में बिजली के झटके देते हो
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    भीड़ तो ऊँचा ही सुनेगी दोस्त
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    मेरी तक़दीर कब खुलेगी दोस्त

    गाँव मेरा बहुत ही छोटा है
    तेरी गाड़ी नहीं रुकेगी दोस्त

    दोस्ती लफ़्ज़ में ही दो है दो
    सिर्फ़ तेरी नहीं चलेगी दोस्त
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    Zubair Ali Tabish
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