किसी उम्मीद को यूँँ पाल रक्खा हैकि लाचारी को कल पर टाल रक्खा हैहमें तो आज ही पाना है तुझ को दोस्ततिरा कल के लिए रूमाल रक्खा है— Sanjay Bhat