मंज़िलों की प्यास है ये ज़िंदगीतेरी मेरी आस है ये ज़िंदगीइस सफ़र में ख़ार भी हैं गुल के साथफिर भी कितनी ख़ास है ये ज़िंदगी— Sanjay Bhat