आज से तू ऐसे अपनी जंग का आग़ाज़ कर
तोड़ दे ज़ंजीर-ए-पाँ को अर्श पर परवाज़ कर
जो भी मेरी ग़लतियाँ हैं सब नज़र अंदाज़ कर
ऐ मिरे हमराज़ तू अपना मुझे हमराज़ कर
सिसकियाँ लेने से तुझको हक़ नहीं मिल पाएगा
हुक्मराँ बहरा है थोड़ा ज़ोर से आवाज़ कर
तू तसव्वुर कर मैं तेरी मिल्कियत का भाग हूँ
ऐ मिरे हाकिम ले अपनी मिल्कियत पर नाज़ कर
तेरी फ़ुर्क़त ये तक़ाज़ा करती रहती है शजर
'इश्क़ के मारे हुए ख़ुद को सुख़न-परदाज़ कर
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