महफ़िल में उसने 'इश्क़ का ऐलान कर दिया
सब दोस्तों को सखियों को हैरान कर दिया
उसने सुना के तर्के ए तअल्लुक़ का फ़ैसला
इक चलते फिरते जिस्म को बे जान कर दिया
कहकर क़ुबूल उसने शजर के क़ुबूल पर
देखो शजर को साहिब-ए-ईमान कर दिया
मुझ ख़ाकसार शख़्स को माँ की दुआओं ने
इक सल्तनत का दोस्तों सुलतान कर दिया
हमने सनम को सिर्फ़ सनम ही रखा 'शजर'
और आपने सनम को ही भगवान कर दिया
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