ज़ुल्म की मिल के क़मर ऐसे करेंगे ख़म सबदूर हो जाएँगे ये अपने वतन से ग़म सबख़्वाब अज्दाद ने जो देखा है इक दिन उस कीदेखना ख़ून से ता'बीर लिखेंगे हम सब— Shajar Abbas