अगर हमारी इन आँखों से ख़ून टपकेगा
तो सोच लेना शिवालों से ख़ून टपकेगा
मैं चुप हूँ यार सो चुप रहने दे ख़ुदा के लिए
ज़बाँ खुलेगी तो लफ़्ज़ों से ख़ून टपकेगा
अगर सुना दूँ मैं रूदाद-ए-ग़म इन्हें अपनी
तो यार सूखे दरख़्तों से ख़ून टपकेगा
है इतना दर्द-ए-दरूँ मैं अगर लिखूँगा ग़ज़ल
तो बा खिरद मेरी ग़ज़लों से ख़ून टपकेगा
शजर जो बंद दरीचों को खोल दूँ दिल के
तो दिल के सारे दरीचों से ख़ून टपकेगा
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Shajar Abbas
our suggestion based on Shajar Abbas
As you were reading Khamoshi Shayari Shayari