mire yaar ahbaab mehboob hamdam sabhi saf men dushman kii yakjaa khade hain | मिरे यार अहबाब महबूब हमदम सभी सफ़ में दुश्मन की यकजा खड़े हैं

  - Shajar Abbas

मिरे यार अहबाब महबूब हमदम सभी सफ़ में दुश्मन की यकजा खड़े हैं
मुसीबत में किससे मदद माँगू आख़िर मुझे साँस लेने के लाले पड़े हैं

जिन्हें तिल समझता है सारा ज़माना ये तिल तिल नहीं हैं तुम्हारे बदन पर
तुम्हें हुस्न के साथ तिल दे के रब ने फ़लक की जबीं पर सितारे जड़े हैं

बिना बात हर बात पर लड़ने वालों अगर हमसे लड़ना तो ये सोच लेना
मुसीबत उठाई है हर गाम हमने तुम्हारे लिए हम जहाँ से लड़े हैं

मुहब्बत के मक़तल में जो हाल-ए-दिल है बयाँ कर रहा है मनादी बिलखकर
बदन दिल का जलती ज़मीं पर है उर्यां जुदाई के सीने में नेज़े गड़े हैं

'अजब मरहला है मुसीबत में जाँ है करें तो करें क्या हैं इस कश्मकश में
हमें ज़िद है हम दिल किसी को न देंगे उन्हें चाहिए दिल वो ज़िद पर अड़े हैं

जो मैं कह रहा हूँ वो सुन ग़ौर से तू न कर शैख़ जी का 'शजर' से तक़ाबुल
'शजर' की बराबर नहीं हैं ये आक़िल भले ही ये क़द में 'शजर' से बड़े हैं

  - Shajar Abbas

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