shajar ko meer ki tarah khuda adeeb banaa | 'शजर' को 'मीर' की तरह ख़ुदा अदीब बना

  - Shajar Abbas

'शजर' को 'मीर' की तरह ख़ुदा अदीब बना
फिर उसके बाद उसे तू मेरा हबीब बना

ज़माना चीख उठे हाल देखकर तेरा
तू अपने हाल को कुछ इस क़दर मुहीब बना

मुझे सम्भाल के रख अपने दिल के आँंगन में
मैं चाहता हूँ मुझे यार तू नजीब बना

वबा-ए-इश्क़ ज़माने से दूर हो जाए
ख़ुदारा कोई तो ऐसी दवा तबीब बना

दिल ओ दिमाग को ये रंज खाय जाता है
हमारी जान का दुश्मन तेरा रकीब बना

मता-ए-जान दुआ माँगती है रो-रो कर
मेरे इलाही 'शजर' को मेरा नसीब बना

  - Shajar Abbas

Revenge Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Shajar Abbas

As you were reading Shayari by Shajar Abbas

Similar Writers

our suggestion based on Shajar Abbas

Similar Moods

As you were reading Revenge Shayari Shayari