zamaana hansne laga KHvaab jab sunaaya gaya | ज़माना हँसने लगा ख़्वाब जब सुनाया गया

  - Shajar Abbas

ज़माना हँसने लगा ख़्वाब जब सुनाया गया
मैं आज कमरे में पंखे से लटका पाया गया

ग़म-ए-फ़िराक़ तेरा इस तरह मनाया गया
कभी ख़तों को कभी क़ल्ब को जलाया गया

किसी ने ये नहीं पूछा के क्यूँ हो गिर्या कुनाँ
तमाम गिर्या-वा-ज़ारी हमारा ज़ाया' गया

हर एक देखने वाले ने सर को पीट लिया
सफ़ेद कपड़ों से ऐसे मुझे सजाया गया

सिसक सिसक के बहुत रोई याद में उसकी
शजर का नाम कलाई से जब मिटाया गया

  - Shajar Abbas

Promise Shayari

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