ये सना करता फिरे है इक सना-ख़्वाँ देखिए
हल्क़ा-ए-अहबाब में हैं दुश्मन-ए-जाँ देखिए
रोज़-ओ-शब करती है शीरी ऐसे गिर्यां देखिए
हज़रत-ए-फरहाद का हाल-ए-परेशाँ देखिए
कमसिनी में देगा इक बच्चा गवाही आनकार
पाक-ओ-पाकीज़ा है यूसुफ़ का गिरेबाँ देखिए
कोई सहरा में उड़ाता फिर रहा है ख़ाक तो
कोई करता है कहीं जश्न-ए-चराग़ाँ देखिए
थी हुकूमत जिनकी दिल की सल्तनत पे कल तलक
आज हैं वो सल्तनत मैं दिल की मेहमाँ देखिए
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