दिनों की बात छोड़ो रात कैसे कट रही हैसुना है जुगनुओं से दोस्ती तुम कर रहे होबुरे हालात की कुछ ख़ास यादों को समेटेउन्हीं से डर रहे हो और डर से मर रहे हो— Vishakt ki Kalam se