Vishakt ki Kalam se

Vishakt ki Kalam se

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Vishakt ki Kalam se shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Vishakt ki Kalam se's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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Sher

मुझे आज़ाद कर दो रोज़ के इस मा'मले से अब मुझे अब मौत बख़्शो जी चुका मैं ज़िंदगी अपनी — Vishakt ki Kalam se
बदल कर मैं कहानी को तुम्हें आज़ाद कर दूँ क्या न कोई नाम लेगा फिर तुम्हारा साथ में मेरे — Vishakt ki Kalam se
मुझे भी तो पिलाओ मैं नशा भी आज़माऊॅं अमर हूँ मैं मुझे पी ज़हर भी तो मर गया है — Vishakt ki Kalam se
हवा को रोकने की बात जैसे कर रहे हो तुम मुझे ये नौकरी कम जेल ज़्यादा लग रही है जी — Vishakt ki Kalam se
अगर मेरा चले बस तो हवा भी पूछती मुझ सेे बता माशूक को तेरी हमारी क्या ज़रूरत है — Vishakt ki Kalam se
ज़रूरी तो नहीं उस की हँसी में प्यार ही हो हँसी के इस जहाँ में और भी मतलब बहुत हैं — Vishakt ki Kalam se
मुझे इक काम है तुम से करोगे तो बताओ तुम तुम्हें जब नींद आ जाए पता देना उसे मेरा — Vishakt ki Kalam se
क्या हुआ ये भीड़ कैसी ग़म नहीं फिर पीड़ कैसी — Vishakt ki Kalam se
जवानी और मुश्किल लग रही है वही बचपन सही था यार अपना — Vishakt ki Kalam se

Ghazal

जुए ने जान के सब को जुवारी कर दिया है किसी का छीन कर जीवन किसी का भर दिया है जिसे सब बाप कहते है किया उस ने भला क्या हमारे देश को बाँटा हमें दुश्मन दिया है लड़ाई से नहीं जीता गया जब हौसले को बना कर देश का दुश्मन उसे ख़ंजर दिया है ज़माना ये ज़माने से यही सब सीखता है दिया जिस ने यहाँ आदर उसे ख़ंजर दिया है अगर मैं नाम लिखता हूँ क़लम रोती है मेरी हमारी जान लेने को उन्हें लश्कर दिया है किसी के बाप ने पैदा नहीं की थी ज़मीं वो हमारा ख़ून था उस पर जिसे धो कर दिया है मरे तो वो मगर मरते हुए उन ज़ालिमों ने हमारे देश को चलता हुआ चौसर दिया है लगाकर जान की बाज़ी शहीदी पा गए जो उन्हीं की सोच ने इस देश को रहबर दिया है लड़े जिस देश का नक़्शा समेटे आँख में वो मगर आज़ाद भारत तो हमें कट कर दिया है शहीदों से नज़र कैसे मिलाएँगे भला वो जिन्होंने देश को दंगा यहाँ अक्सर दिया है — Vishakt ki Kalam se
किसी को देख लूॅं जो मैं उसे मैं जान लेता हूँ भला है या बुरा है वो उसे पहचान लेता हूँ कहीं आसान होता है छुड़ाना हाथ अपना ख़ुद कहीं पर ग़म पराए भी दिखें तो ध्यान देता हूँ नहीं शिकवा मुझे कोई नहीं कोई शिकायत है मुझे जो लोग कहते हैं वही सब मान लेता हूँ किसी को मैं नहीं भाता कहीं कुछ और दिक़्क़त है मगर दिक़्क़त नहीं वो मैं यही ख़ुद मान लेता हूँ मुझे कोई अगर आँखें दिखाता है दिखा ले फिर मिरे रखवाल हैं शम्भू यही मैं मान लेता हूँ मुझे ग़ुस्सा नहीं आता सुना है आज ये मैं ने हँसी आती है सुन कर तो हँसी पर ध्यान देता हूँ — Vishakt ki Kalam se

Nazm

" तेरी ख़ुशी में " किताबें लिख रहा हूँ सोच कर मैं नाम तेरा यही तो रह गया है अब यहाँ पर काम मेरा अभी भी आख़िरी पन्ने मिरे ख़ाली पड़े हैं अभी भी याद में तेरी यहाँ ठाली खड़े हैं किताबों की कहानी में तुझे ही खोजते हैं निकल जाता हैं दिन फिर रात भर हम सोचते हैं कभी तू भी हमें चाहें हमें तू याद कर लें कभी तू भी भरे दिल को खुला आबाद कर लें नहीं दिखता हमें कोई यहाँ तुझ सा सितमगर नहीं जो बोल सकता तू अभी सब ये भसम कर मिटा दे तू सभी यादें मिटा दे वो सभी पल मिटा दे तू अभी सब कुछ मिटा दे वो मिरा कल यहाँ भी मैं तिरा दीदार करने की ख़ुशी में मिटा दूँगा अभी ये रार मरने की ख़ुशी में — Vishakt ki Kalam se