बनो बादल कभी तुम भी
भिगाओ रूह को मेरी
सुनाओ गीत तुम अपने
सुनो तुम रागिनी मेरी
कभी मौक़ा मुझे भी दो
मुझे भी है तलब तेरी
तुझे चाहा न बस मैं ने
तू ही है आरज़ू मेरी
मुझे तेरी ज़रूरत है
तुझे भी चाह हो मेरी
— Vishakt ki Kalam se
भिगाओ रूह को मेरी
सुनाओ गीत तुम अपने
सुनो तुम रागिनी मेरी
कभी मौक़ा मुझे भी दो
मुझे भी है तलब तेरी
तुझे चाहा न बस मैं ने
तू ही है आरज़ू मेरी
मुझे तेरी ज़रूरत है
तुझे भी चाह हो मेरी
Other ghazal from the same pen
Voices in the same orbit
Poetry by feeling