तराज़ू हाथ में लो भाव को अब तोलना होगा
अभी तक चुप रहे थे तुम मगर अब बोलना होगा
तुम्हारी इस दशा ने ही बिगाड़ा है सभी कुछ तो
लगी है गाँठ जो गहरी इसे अब खोलना होगा
किसी से मत डरो आगे बढ़ो वो भेद खोलो अब
तुम्हें अब छोड़ कर सब भय यहाँ पर बोलना होगा
— Vishakt ki Kalam se















