उठी मूॅंछें बढ़ी दाढ़ी यही हूँ मैं
तुम्हें लगता नहीं था जो वही हूँ मैं
सही हो तुम शरीफ़ों में नहीं हूँ मैं
ग़लत कह दो अगर मुझ को वही हूँ मैं
मिरे जैसे दिखें तुम को नहीं वो मैं
सही हो तुम मगर जब तक सही हूँ मैं
दिखूॅं ख़ूॅंखार तो बेशक नहीं हूँ मैं
कभी जो था यहाँ बेकार वही हूँ मैं
— Vishakt ki Kalam se















