हवस में जीत के मैं सौ दफ़ा हारा हुआ हूँनगर की धूप वर्षा धूल का मारा हुआ हूँमुझे इस जान का मालिक न समझो लाश हूँ मैंपसंदीदा हमारे फूल का मारा हुआ हूँ— Vishakt ki Kalam se