भावना में बह गया था
दर्द अपने सह गया था
रूप रेखा बन गई थी
बस बदलना रह गया था
भूल जाऊॅंगा तुम्हें भी
ये तुम्हीं से कह गया था
क्या कहा था याद है सब
लहर बनकर बह गया था
सोचता हूँ मैं न कहता
जो तभी मैं कह गया था
— Vishakt ki Kalam se
दर्द अपने सह गया था
रूप रेखा बन गई थी
बस बदलना रह गया था
भूल जाऊॅंगा तुम्हें भी
ये तुम्हीं से कह गया था
क्या कहा था याद है सब
लहर बनकर बह गया था
सोचता हूँ मैं न कहता
जो तभी मैं कह गया था
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