ख़्वाब लिख कर सो गया था
ख़्वाब में ही खो गया था
ख़्वाब पूरा हो न पाया
ख़्वाब में जो हो गया था
रो नहीं पाया कभी जो
ख़्वाब में वो रो गया था
ऑंसुओ से आँख धोई
पाप अपने धो गया था
बाक़ियों की ख़ैर मुझ से
पूछ कर वो जो गया था
हाॅं वही तो था खिलाड़ी
खेल दिल से जो गया था
जो यहाॅं काँटे बिछे हैं
बीज़ वो ही बो गया था
क्या हुआ जो मर गया वो
ठीक था जब वो गया था
ख़्वाब पूरा हो तभी वो
नींद गहरी सो गया था
— Vishakt ki Kalam se















