सुनो मैं चाहता हूँ अब कि ऐसी बात हो जाए
वहाँ तुम ज़ुल्फ़ बिखराओ यहाँ बरसात हो जाए
कभी लब को तेरे चूमूँ कभी ज़ुल्फ़ें सँवारूँ मैं
भली सी एक ख़्वाहिश है कि ऐसी रात हो जाए
निगाहें यूँ मिलाओ तुम नज़र के तीर बरसाओ
कभी जो जंग हो तुमसे हमारी मात हो जाए
सितारे यूँ तकें तुझको चमकता चाँद लगती है
अगर आँचल तेरा ढलके फ़लक में रात हो जाए
किसी जानिब को जब निकले सफ़र में हमसफ़र हो तू
भला क्या बात हो जानाँ तेरा जो साथ हो जाए
तमन्ना है यही मेरी कि तेरा हाथ मिल जाए
तुझे हम पा अगर जो लें बसर औक़ात हो जाए
Read Full