मुकम्मल तो हैं पर कमी रह गई
नज़र ये वहीं पर जमी रह गई
तेरी आँखें जो ख़ुश्क सी रहती हैं
उन आँखों की मुझ
में नमी रह गई
वो साँसें जब उस की थमीं एक दिन
मेरी ये घड़ी भी थमी रह गई
— Yuvraj Singh Faujdar
नज़र ये वहीं पर जमी रह गई
तेरी आँखें जो ख़ुश्क सी रहती हैं
उन आँखों की मुझ
में नमी रह गई
वो साँसें जब उस की थमीं एक दिन
मेरी ये घड़ी भी थमी रह गई
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