नया बरस है दिन नया जो दिन नहीं सवाल है
कि आज तुम को है ख़ुशी या आज भी मलाल है
दवा मिला के जाम में मैं पी गया था शाम में
के सर्द-ऐ-तमाम में नशा ही मेरी शाल है
जैसे कोई ग़ज़ल पढ़ी देखा उसे तो दाद दी-
परी है या है शा'इरी कमाल है कमाल है
मेरी नज़र में आओगी बेताबियाँ बढ़ाओगी
अकेला छोड़ जाओगी बड़ी हसीन चाल है
ये हिज्र कोई घात है क़ैदे-तख़य्युलात है
मरज़-ऐ-नफ़्सियात है जो सच नहीं ख़याल है
सुख़न बनी है ज़िन्दगी नफ़स नफ़स है शा'इरी
ग़ज़ल से मेरी आशिक़ी ग़ज़ब है बेमिसाल है
दर्पन
— Darpan















