fizaon ko jawaan phoolon ki sohbat kyun zaroori hai | फ़िज़ाओं को जवाँ फूलों की सोहबत क्यूँँ ज़रूरी है,

  - Darpan

फ़िज़ाओं को जवाँ फूलों की सोहबत क्यूँँ ज़रूरी है,
ये ज़ाती मसअला है पूछना मत क्यूँँ ज़रूरी है

सफ़र में मुश्किलों का मोल पहचाना तो ये जानाँ,
चराग़ों को हवाओं की ज़रूरत क्यूँँ ज़रूरी है

जफ़ा के दायरे पामाल करने से वफ़ा आई,
झगड़ने से खुला हमपर मुहब्बत क्यूँँ ज़रूरी है

क़फ़स में क़ैद इक चिड़िया को देखा तब समझ आया,
हमारे ख़ून में आख़िर बग़ावत क्यूँँ ज़रुरी है

नसीहत दे रहे हैं सब ये ऐसा हो वो वैसा हो,
सयाने हैं सब इतने तो अदालत क्यूँँ ज़रूरी है

बताएगा तुम्हें 'दर्पन' उसे तुम पूछ के देखो,
ज़माने से भला ख़ुद की हिफाज़त क्यूँँ ज़रूरी है

  - Darpan

Musafir Shayari

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