chupke se fareb kha liya hai | चुपके से फ़रेब खा लिया है

  - Ahmad Nadeem Qasmi

चुपके से फ़रेब खा लिया है
हमने तेरा भेद पा लिया है

गो लुट गए ज़िन्दगी के हाथों
हमने तेरा ग़म बचा लिया है

जब दर्द उठा तो रो दिए हम
फिर देर तलक मज़ा लिया है

ऐ गुल तुझे पा ही लेंगे इक दिन
ख़ुशबू से तेरा पता लिया है

ख़ुर्शीद को जब ज़वाल आया
हर चीज़ ने क़द बढ़ा लिया है

बंदों ने ख़ुदा की जुस्तुजू में
बंदों को ख़ुदा बना लिया है

मैं क़ैस का हम-नसीब निकला
हर तिफ़्ल ने संग उठा लिया है

  - Ahmad Nadeem Qasmi

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