ऐब ऐसे निकालते हैं वोजैसे घर बार पालते हैं वोजैसे उन के कहे पे हूँ अब तकजैसे मुझ को सँभालते हैं वोनिस्बतन मैं गदा हूँ उन का परजाने क्यूँ दर से टालते हैं वो— Aktar ali