haath se mehnat kare mazdoor hai | हाथ से मेहनत करे मज़दूर है

  - Aniket sagar

हाथ से मेहनत करे मज़दूर है
कौन कहता हैं कि वो मजबूर है

चाय की टपरी पे बच्चा तो वही
नाम छोटू से बड़ा मशहूर है

शौक़ से करता नहीं मैं नौकरी
घर चलाने का यहीं दस्तूर है

सिलसिला ग़म का चलेगा उम्रभर
वो ख़ुशी का दौर काफ़ी दूर है

दिल जियादा प्यार में पड़ता नहीं
वो उसी के दर्द में मख्मूर है

शायरी में बोलता सागर तभी
शायरी में आज उसका नूर है

  - Aniket sagar

Kisaan Shayari

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