बदलती हुई तेरी निय्यत मुबारक
तुझे 'इश्क़ की ये तिजारत मुबारक
जो है बे-वफ़ाई की आदत मुबारक
हसीनों तुम्हें ये रिवायत मुबारक
ये रुतबा ये जल्वे ये शोहरत मुबारक
तुझे चार दिन की ये इज़्ज़त मुबारक
मैं अपनी मशक़्क़त के लुक़्मों पे ख़ुश हूँ
तुझे शाह तेरी विरासत मुबारक
मेरे हाल पर सब उछल कर ये बोले
तुम्हें 'इश्क़ और ये मोहब्बत मुबारक
जो की 'इश्क़ के नाम पर जाँ निछावर
हो परवाने को ये शहादत मुबारक
सनम है कहीं रब कहीं रब सनम है
जहाँ जिसकी जैसी इबादत मुबारक
जहाँ भर में यकदम से मैं छा गया हूँ
किया 'इश्क़ बर्बाद हज़रत मुबारक
मेरे 'इश्क़ का क़त्ल कर ख़ुश है 'साहिल'
यही थी तेरे दिल की हसरत मुबारक
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