sab log poochhte hain muhabbat men kya mila | सब लोग पूछते हैं मुहब्बत में क्या मिला

  - Dharmesh bashar

सब लोग पूछते हैं मुहब्बत में क्या मिला
मैं क्या कहूँ कि यार मिला या ख़ुदा मिला

रातों की नींद उड़ गई दिन का गया सुकूँ
कुछ ऐसे बाँकपन से वो काफ़िर-अदा मिला

कल तक सजी हुई थी जहाँ दिल की काइनात
वाँ आज एक टूटा हुआ आइना मिला

इक शौक़-ए-वस्ल था कि रहा महव-ए-जुस्तजू
इक दर्द-ए-हिज्र था कि मुझे बारहा मिला

फूलों की अंजुमन से कि तारों की बज़्म से
क्या जाने किस मक़ाम से उसका पता मिला

देखा उसे तो रूह पे मस्ती सी छा गई
महसूस यूँँ हुआ कि कोई मय-कदा मिला

मेरी दु'आ यही है कि उस बुत की ख़ैर हो
जिसके तुफ़ैल से मुझे मेरा ख़ुदा मिला

वो देख कर 'बशर' की ये रीश-ए-दराज़ को
बोला ख़ुदा का शुक्र है इक पारसा मिला

  - Dharmesh bashar

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