shaayad ki tasavvur men hai dildaar ka saaya | शायद कि तसव्वुर में है दिलदार का साया

  - Dharmesh bashar

शायद कि तसव्वुर में है दिलदार का साया
हर सू नज़र आता है मुझे प्यार का साया

औरों पे रखा जिसने सदा प्यार का साया
आज उसकी ही गर्दन पे है तलवार का साया

हल्की सी इक उम्मीद रही दिल में कि जैसे
चिलमन से झलकता हुआ रुख़्सार का साया

आशिक़ है जो कमज़ोर तो हल्का हो कफ़न भी
काफ़ी है फ़क़त दामन-ए-दिलदार का साया

सुर्ख़ी की तलब ज़ेहन पे हो जाती है हावी
किरदार बदल देता है अख़बार का साया

ऐसा तो हुआ क्या ये मेरे चारागरों को
डरते हैं कि पड़ जाए न बीमार का साया

कातिल से 'बशर' जीने की मोहलत तो मिली है
हर वक़्त मगर सर पे है तलवार का साया

  - Dharmesh bashar

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